ज़िदंगी की तस्वीर में मौत का रंग भरने से पहले,
ग़मों के नाज़ुक जाम का इन लबों से टकराने के पहले,
दे जाओ वक़्त को अपने होठों की हंसी,
भर लो निगाहों में लम्हों के दर्द की नमी,
इस पिंजरे से उस परिदें के उड़ने के पहले......
शनिवार, 13 फ़रवरी 2010
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